केरल में नए वोटर 80+ उम्र वालों से 57% कम: बाहर जाने के चलन और प्रजनन दर गिरने से सबसे साक्षर राज्य में बुजुर्ग बढ़े

कोच्चि20 मिनट पहले

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केरल में इस बार 80 से ज्यादा उम्र वाले बुजुर्ग वोटरों की संख्या 6,59,227 है। (फाइल)

दक्षिण भारत का सबसे खूबसूरत राज्य केरल अब बूढ़ा हो रहा है। यहां बुजुर्गों और नौजवानों की आबादी में जबरदस्त अंतर आया है। चुनाव आयोग के मुताबिक राज्य में 18-19 साल के युवाओं की तुलना में 80 से अधिक उम्र के बुजुर्ग वोटर्स की संख्या 57% ज्यादा है।

2019 में यह फासला 47% तो 2014 में 36% के आसपास था। इस बार फर्स्ट टाइम वोटर 2,88,533 तो 80+ के बुजुर्ग वोटर 6,59,227 हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में इन बुजुर्गों का आंकड़ा 6.22 लाख था, यानी 3 साल में 37 हजार बुजुर्ग बढ़ गए। 2.70 करोड़ वोटर्स में 60 की उम्र वाले 63.49 लाख हैं।

जनसांख्यिकी विशेषज्ञों की मानें तो सबसे ज्यादा 96.2% साक्षरता वाले केरल में बुजुर्गों की संख्या बढ़ने की तीन बड़ी वजह हैं। पहली- नौजवानों का केरल छोड़ना। दूसरी- प्रजनन दर में गिरावट और तीसरी- औसत जीवन प्रत्याशा अधिक होना।

2023 में 41 हजार यूथ ने घर छोड़ा, ज्यादातर परिवारों में 2 से कम बच्चे
पासपोर्ट कार्यालय के मुताबिक राज्य के युवा बाहर पढ़ाई और जॉब के लिए जा रहे हैं। 2016 में 18,428 नौजवानों ने केरल छोड़ा था। 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 41,139 हो गया। इनमें ज्यादातर वो हैं, जिन्होंने 17 की उम्र के बाद घर छोड़ा।

इसी तरह, जो प्रजनन दर 1961 से 1971 तक 5 के आसपास थी, वो अब 1.5% है। जबकि देश में यह औसत 2 है। यानी प्रति परिवार 2 से भी कम बच्चे पैदा हो रहे। जबकि यहां महिला वोटरों की संख्या (1.39 करोड़) पुरुषों से 8.94 लाख ज्यादा है।

इसके अलावा, आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक यहां औसत उम्र 75 साल है, जबकि देश में 70 साल। यानी यहां लोग लंबा जी रहे हैं।

पहले खाड़ी देशों से लौट आते थे, अब नहीं लौटते
तिरुवनंतपुरम स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट के संस्थापक डॉ. इरुदरयराजन के मुताबिक केरल में पलायन का ट्रेंड बीते 10 साल में बदला है। पहले युवा खाड़ी देश जाते थे, लेकिन जरूरत पड़ने पर या कुछ सालों पर लौट भी आते थे। अब यूथ पढ़ाई के लिए ऐसे देश चुन रहे हैं, जहां जॉब की संभावना ज्यादा हो। साथ ही, वो स्थाई माइग्रेशन पर जोर दे रहे हैं।

मध्य केरल में ईसाई आबादी घट रही
मध्य केरल में ईसाई आबादी भी लगातार घट रही है। घर छोड़ने के ट्रेंड ने क्रिश्चियन बहुल तीन जिलों कोट्टायम, इडुक्की और पथानमथिट्टा को युवाओं से लगभग वीरान कर दिया है। यहां अकेले रह रहे माता-पिता की संख्या अब ज्यादा है।

2011 की जनगणना के अनुसार केरल में हिंदू 54.7%, मुस्लिम 26.6% और ईसाई 18.4% हैं। सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज के डॉ. केसी जकारिया बताते हैं कि 2001-2011 तक तीनों धर्मों में आबादी बढ़ी, लेकिन 14 में से 4 जिलों में ईसाइयों की आबादी घटी।

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